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NIPT — गर्भ में बच्चे की बिना चीरे वाली जांच
NIPT · नॉन-इन्वेसिव प्रीनेटल टेस्ट · गर्भवती महिला का DNA स्क्रीनिंग टेस्ट · डाउन सिंड्रोम का ब्लड टेस्ट · गर्भ में बच्चे का जेनेटिक टेस्ट
गर्भवती महिला की नस से खून लिया जाता है। उसमें बच्चे का DNA भी होता है, जिससे कुछ क्रोमोसोम की बीमारियों का खतरा आंका जाता है।
आमतौर पर गर्भावस्था के 10वें हफ्ते के बाद: डाउन सिंड्रोम और दूसरी क्रोमोसोम की समस्याओं का खतरा जानने के लिए, खासकर जब स्क्रीनिंग में खतरा ज़्यादा आया हो।
⏱ कितना समय लगता है: खून लेने में 3–5 मिनट, रिपोर्ट आमतौर पर 7–14 दिन में

डॉक्टर को ज़रूर बताएँ
तैयारी कैसे करें
- समय. आमतौर पर 10 हफ्ते से पहले नहीं करवाते। सही समय डॉक्टर या क्लिनिक बताएंगे।
- खाना. आमतौर पर खाली पेट रहने की ज़रूरत नहीं। क्लिनिक से पूछ लें।
- कपड़े. आस्तीन ऐसी हो जो कोहनी के ऊपर तक आसानी से चढ़ सके।
साथ क्या लाएँ
- रेफरल पर्ची
- पहचान पत्र
- अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, जिसमें गर्भ का सही हफ्ता लिखा हो
यह कैसे होता है
- आप एक फॉर्म भरती हैं: गर्भ का हफ्ता, कद, वज़न, गर्भावस्था की जानकारी
- बैठती हैं, हाथ आर्मरेस्ट पर रखा जाता है
- कोहनी के ऊपर पट्टी बांधी जाती है और त्वचा साफ की जाती है
- खास ट्यूब में खून लिया जाता है
- सुई निकालकर रुई रखी जाती है
आपको क्या महसूस होगा
- छोटी-सी चुभन, जैसे चुटकी काटी हो
- बच्चे के लिए यह जांच सुरक्षित है — खून सिर्फ़ मां से लिया जाता है
उसके बाद
- रुई को 3–5 मिनट दबाकर रखें
- रिपोर्ट आमतौर पर 7–14 दिन में आती है
- अगर खतरा ज़्यादा निकले तो डॉक्टर आगे की जांच सुझाएंगे — NIPT अंतिम निदान नहीं है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या NIPT से बच्चे को नुकसान हो सकता है?
नहीं। सिर्फ़ मां की नस से खून लिया जाता है, जैसे आम जांच में।
अगर NIPT ठीक आए तो क्या अल्ट्रासाउंड स्क्रीनिंग नहीं करवानी?
करवानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड कुछ और दिखाता है — अंगों का विकास। डॉक्टर आमतौर पर दोनों लिखते हैं।
क्या बच्चे का लिंग पता चल सकता है?
कई टेस्ट यह दिखाते हैं। अगर जानना चाहें तो क्लिनिक से पूछ लें।