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पेशाब की सामान्य जांच
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सुबह का पेशाब घर पर डिब्बी में लेकर लैब में दिया जाता है। इससे पता चलता है कि किडनी कैसे काम कर रही है और कहीं सूजन तो नहीं है।
नियमित जांच में, पेट के निचले हिस्से या कमर में दर्द होने पर, बार-बार या दर्द के साथ पेशाब आने पर, गर्भावस्था में, डायबिटीज़ में।
⏱ कितना समय लगता है: घर पर नमूना लेने में 2–3 मिनट; नतीजा आमतौर पर अगले दिन

डॉक्टर को ज़रूर बताएँ
तैयारी कैसे करें
- डिब्बी. दवा की दुकान या लैब से साफ़ (स्टेराइल) डिब्बी ले लें। खाने की डिब्बी या जार न लें।
- एक दिन पहले. चुकंदर और पेशाब का रंग बदलने वाली चीज़ें न खाएं। शराब और भारी कसरत न करें। पानी रोज़ की तरह पिएं।
- सुबह. गुनगुने पानी से, बिना खुशबू वाले साबुन के, साफ़ करें। महिलाएं योनि के मुंह पर रुई का फाहा रख लें तो बेहतर।
- नमूना लेना. सुबह का पहला पेशाब चाहिए, बीच की धार: शुरू के कुछ सेकंड शौचालय में, फिर डिब्बी में, और आखिर फिर शौचालय में।
साथ क्या लाएँ
- पेशाब की डिब्बी, कसकर बंद और नाम लिखी हुई
- डॉक्टर की पर्ची (रेफरल)
यह कैसे होता है
- सुबह साफ़ करने के बाद शौचालय में पेशाब शुरू करें
- धार रोके बिना डिब्बी आगे कर दें
- डिब्बी को लगभग आधा भरें
- बाकी पेशाब शौचालय में करें और ढक्कन कसकर बंद करें
- 1–2 घंटे के अंदर लैब पहुंचा दें
आपको क्या महसूस होगा
- कुछ नहीं
उसके बाद
- नतीजा डॉक्टर समझाएंगे
- अगर पेशाब में कुछ बदलाव मिला, तो जांच अक्सर दोबारा करवाई जाती है
इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- पेशाब में खून, कमर में तेज़ दर्द और बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या माहवारी के दौरान पेशाब की जांच करवा सकते हैं?
बेहतर नहीं है, क्योंकि खून नमूने में आ जाएगा। आमतौर पर इसे माहवारी खत्म होने के 2–3 दिन बाद करवाते हैं।
क्या पेशाब रात को लेकर रख सकते हैं?
नहीं। सुबह का ताज़ा पेशाब चाहिए और उसे 1–2 घंटे में लैब पहुंचाना होता है।