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गर्भवती महिलाओं की बायोकेमिकल स्क्रीनिंग
गर्भावस्था की स्क्रीनिंग · डबल मार्कर टेस्ट · ट्रिपल मार्कर टेस्ट · बायोकेमिकल स्क्रीनिंग · पहली स्क्रीनिंग
गर्भवती महिला की नस से खून लेकर उसमें ख़ास प्रोटीन और हार्मोन जाँचे जाते हैं। अल्ट्रासाउंड के साथ यह बच्चे में कुछ बीमारियों का जोखिम आँकने में मदद करता है।
सभी गर्भवती महिलाओं के लिए तय समय पर: आमतौर पर 11-14 हफ़्ते में, कभी-कभी दूसरी तिमाही में।
⏱ कितना समय लगता है: खून लेने में 3-5 मिनट; नतीजा आमतौर पर 2-7 दिन में

डॉक्टर को ज़रूर बताएँ
तैयारी कैसे करें
- समय. खून डॉक्टर के बताए समय पर दिया जाता है। अक्सर अल्ट्रासाउंड स्क्रीनिंग के उसी दिन या आस-पास।
- खाना. आमतौर पर खाली पेट या हल्का खाने के कुछ घंटे बाद। एक दिन पहले चिकना न खाएँ। क्लिनिक से पूछ लें।
- कपड़े. ऐसी आस्तीन, जो कोहनी से ऊपर आसानी से चढ़ाई जा सके।
साथ क्या लाएँ
- रेफ़रल पर्ची
- पहचान पत्र
- अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट
यह कैसे होता है
- आप फ़ॉर्म भरती हैं: गर्भ का समय, वज़न, कद
- बैठती हैं, हाथ हत्थे पर रखा जाता है
- कोहनी के ऊपर पट्टा कसा जाता है, त्वचा साफ़ की जाती है
- खून ट्यूब में लिया जाता है
- सुई निकालकर रुई रखी जाती है
आपको क्या महसूस होगा
- छोटी-सी चुभन, जैसे चुटकी काटी हो
- बच्चे के लिए यह प्रक्रिया सुरक्षित है
उसके बाद
- रुई को 3-5 मिनट दबाकर रखें
- नतीजा आमतौर पर 2-7 दिन में आता है — यह जोखिम का हिसाब है, बीमारी की पुष्टि नहीं
- अगर जोखिम ज़्यादा निकला, तो डॉक्टर आगे की जाँचें बताएँगे
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ज़्यादा जोखिम का मतलब क्या बच्चे को बीमारी है?
नहीं। इसका मतलब है कि और जाँच करनी चाहिए। ज़्यादा जोखिम वाली ज़्यादातर महिलाओं के बच्चे स्वस्थ होते हैं।
गर्भ का सही समय क्यों ज़रूरी है?
प्रोटीन का स्तर हर हफ़्ते बदलता है। अगर समय सही न हो, तो जोखिम का हिसाब गलत निकलेगा।