गर्भावस्था की पहली तिमाही की स्क्रीनिंग
पहली स्क्रीनिंग · 12 हफ़्ते का अल्ट्रासाउंड · एनटी स्कैन · डबल मार्कर टेस्ट और अल्ट्रासाउंड
11–13 हफ़्ते पर शिशु का अल्ट्रासाउंड और माँ का खून का टेस्ट। दोनों मिलकर शिशु के विकास और कुछ क्रोमोसोम संबंधी समस्याओं के जोखिम का अंदाज़ा देते हैं।
यह सभी गर्भवती महिलाओं को 11–13 हफ़्ते पर कराने की सलाह दी जाती है।
⏱ कितना समय लगता है: अल्ट्रासाउंड आमतौर पर 20–30 मिनट, साथ में खून की जाँच

डॉक्टर को ज़रूर बताएँ
तैयारी कैसे करें
- समय. ठीक 11 हफ़्ते से 13 हफ़्ते 6 दिन के बीच। इसके बाद यह स्क्रीनिंग नहीं की जाती।
- मूत्राशय. क्लिनिक से पूछ लें: कभी भरे मूत्राशय के साथ आने को कहते हैं, कभी ख़ाली।
- खून. खून का टेस्ट आमतौर पर अल्ट्रासाउंड के दिन या 1–2 दिन पहले लैब के नियम के अनुसार कराया जाता है।
साथ क्या लाएँ
- गर्भावस्था का कार्ड या डॉक्टर की पर्ची
- पहले के अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट
यह कैसे होता है
- आप पीठ के बल लेटती हैं और पेट खोलती हैं
- डॉक्टर जेल लगाकर पेट के ऊपर से शिशु को देखते हैं
- शिशु का आकार, दिल की धड़कन और गर्दन के पीछे की परत की मोटाई नापी जाती है
- कभी-कभी साफ़ देखने के लिए योनि के रास्ते वाला प्रोब इस्तेमाल होता है
- अगर खून का टेस्ट अब तक नहीं हुआ तो नस से खून लिया जाता है
आपको क्या महसूस होगा
- दर्द नहीं होता, प्रोब का दबाव महसूस होता है
- आप स्क्रीन पर शिशु को देख सकती हैं और धड़कन सुन सकती हैं
उसके बाद
- अल्ट्रासाउंड और खून की जाँच के आधार पर प्रोग्राम जोखिम निकालता है, नतीजा कुछ दिन में मिलता है
- जोखिम ज़्यादा आना बीमारी का निदान नहीं है: डॉक्टर बताएँगे कि कौन-सी अगली जाँचें करनी हैं
इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- खून जैसा स्राव या पेट के निचले हिस्से में दर्द हो तो स्क्रीनिंग का इंतज़ार न करें, डॉक्टर को दिखाएँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अल्ट्रासाउंड शिशु के लिए नुकसानदेह है?
नहीं। अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था में बरसों से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, इसमें रेडिएशन नहीं होता।