शिशु के कूल्हे के जोड़ों का अल्ट्रासाउंड
कूल्हे का अल्ट्रासाउंड · बच्चे के कूल्हे की जांच · हिप डिस्प्लेसिया की जांच · नवजात के जोड़ों का अल्ट्रासाउंड
डॉक्टर अल्ट्रासाउंड से देखते हैं कि बच्चे के कूल्हे के जोड़ सही बने हैं या नहीं। यह सुरक्षित है और इसमें किरणें नहीं होतीं।
आमतौर पर जीवन के पहले महीनों में नियमित जांच के तौर पर। खासकर जब बच्चा उलटा (पैर की तरफ़ से) पैदा हुआ हो, रिश्तेदारों में कूल्हे की समस्या रही हो, या डॉक्टर को कुछ असमानता दिखी हो।
⏱ कितना समय लगता है: आमतौर पर 10–15 मिनट

डॉक्टर को ज़रूर बताएँ
तैयारी कैसे करें
- उम्र. अल्ट्रासाउंड आमतौर पर 1–3 महीने की उम्र में होता है, समय बच्चों के डॉक्टर या हड्डी रोग विशेषज्ञ बताएंगे।
- दूध पिलाना. आने से 30–40 मिनट पहले बच्चे को दूध पिला दें, भरे पेट वाला बच्चा ज़्यादा शांत लेटता है।
- कपड़े. ऐसे कपड़े जो नीचे से आसानी से उतर जाएं। डायपर रहने दें, बस खोल दें।
साथ क्या लाएँ
- डॉक्टर की पर्ची (रेफरल)
- चादर
- अतिरिक्त डायपर और टिश्यू
- चूसनी या खिलौना, अगर बच्चे को पसंद है
यह कैसे होता है
- बच्चे के नीचे के कपड़े उतारकर उसे करवट लिटाया जाता है
- डॉक्टर जांघ के बगल पर जेल लगाते हैं
- प्रोब को जोड़ के पास कुछ सेकंड रखा जाता है
- फिर दूसरी करवट लिटाकर दूसरा जोड़ देखा जाता है
- आप पास खड़े होकर बच्चे को पकड़ सकती हैं
आपको क्या महसूस होगा
- बच्चे को दर्द नहीं होता, उसे बस ठंडा जेल या पकड़ा जाना पसंद नहीं आ सकता
उसके बाद
- जेल पोंछ दें, आप कपड़े पहना सकते हैं
- रिपोर्ट आमतौर पर तुरंत मिलती है
- अगर डॉक्टर को कोई बदलाव दिखा, तो हड्डी रोग विशेषज्ञ बताएंगे कि आगे क्या करना है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शिशु के कूल्हे का अल्ट्रासाउंड क्यों करवाते हैं?
ताकि डिस्प्लेसिया जल्दी पकड़ में आए। पहले महीनों में इसे ठीक करना सबसे आसान होता है, आमतौर पर बिना ऑपरेशन के।
क्या अल्ट्रासाउंड बच्चे के लिए हानिकारक है?
नहीं। अल्ट्रासाउंड में किरणें नहीं होतीं, इसे ज़रूरत पड़ने पर जितनी बार चाहें करवा सकते हैं।