फॉलिकुलोमेट्री (अंडे की थैली की निगरानी)
फॉलिकुलर स्टडी · ओव्यूलेशन का अल्ट्रासाउंड · ओव्यूलेशन की निगरानी · फॉलिकल का अल्ट्रासाउंड
डॉक्टर चक्र के दौरान कई बार अंडाशय को अल्ट्रासाउंड से देखते हैं। इससे दिखता है कि फॉलिकल (अंडे की थैली) कैसे बढ़ रही है और अंडा निकला या नहीं।
गर्भधारण की योजना बनाते समय, माहवारी अनियमित होने पर, अंडा बनने की दवा के दौरान और IVF से पहले।
⏱ कितना समय लगता है: एक बार की मुलाकात आमतौर पर 10–15 मिनट; एक चक्र में आमतौर पर 2–4 बार; नतीजा तुरंत

डॉक्टर को ज़रूर बताएँ
तैयारी कैसे करें
- कब आना है. पहली बार आमतौर पर चक्र के 8वें–10वें दिन। दिन डॉक्टर बताएंगे, यह चक्र की लंबाई पर निर्भर करता है।
- मूत्राशय. आमतौर पर अंदर वाले प्रोब से किया जाता है, इसलिए मूत्राशय खाली होना चाहिए। जांच से पहले शौचालय हो आएं।
- सफ़ाई. रोज़ की तरह नहा लें। खास तैयारी की ज़रूरत नहीं।
साथ क्या लाएँ
- डॉक्टर की पर्ची (रेफरल)
- चक्र का कैलेंडर या माहवारी की तारीखों वाला ऐप
- पुराने अल्ट्रासाउंड की रिपोर्टें
- चादर और टिश्यू, अगर क्लिनिक में कहा जाए
यह कैसे होता है
- आप कमर के नीचे के कपड़े उतारकर बिस्तर पर लेटती हैं
- प्रोब पर जेल लगा डिस्पोज़ेबल कवर चढ़ाया जाता है
- प्रोब को सावधानी से योनि में डाला जाता है
- डॉक्टर फॉलिकल और गर्भाशय की परत की मोटाई नापते हैं
- आपको बताया जाता है कि अगली बार कब आना है
आपको क्या महसूस होगा
- हल्का दबाव, आमतौर पर दर्द नहीं होता
- अगर अच्छा न लगे तो डॉक्टर को बताएं, वे और नरमी से करेंगे
उसके बाद
- आप तुरंत अपने रोज़ के काम पर लौट सकती हैं
- हर बार का नतीजा तुरंत मिलता है
- आखिर में डॉक्टर बताएंगे कि गर्भधारण के लिए सबसे अच्छे दिन कौन-से हैं या इलाज का अगला कदम क्या होगा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कितनी बार आना पड़ता है?
आमतौर पर एक चक्र में 2–4 बार, जब तक साफ़ न हो जाए कि अंडा निकला या नहीं।
क्या इसमें दर्द होता है?
आमतौर पर नहीं। सिर्फ़ प्रोब का हल्का दबाव महसूस होता है।