← सभी गाइड · हृदय, फेफड़े और नसों की जाँच
बच्चे की स्पाइरोमेट्री
बच्चे की स्पाइरोमेट्री · बच्चे के फेफड़ों की जांच · बच्चों में सांस की जांच · बच्चों का सांस का टेस्ट
बच्चा एक नली में फूंकता है और मशीन दिखाती है कि उसके फेफड़े कैसे काम कर रहे हैं। इसके लिए स्क्रीन पर अक्सर खेल भी होता है।
बार-बार खांसी, छाती में सीटी जैसी आवाज़, अस्थमा के शक में, और यह जांचने के लिए कि इलाज कैसे असर कर रहा है।
⏱ कितना समय लगता है: आमतौर पर 15–30 मिनट, नतीजा उसी समय

डॉक्टर को ज़रूर बताएँ
तैयारी कैसे करें
- दवाइयां. कभी जांच से पहले कुछ घंटे इनहेलर नहीं दिए जाते। यह सिर्फ़ डॉक्टर बताएंगे, खुद से बंद न करें।
- सेहत. अगर बच्चा बीमार पड़ गया है, तो आमतौर पर जांच टालना बेहतर है। क्लिनिक को फ़ोन करें।
- खाना. हल्का नाश्ता, भरपेट नहीं, भरे पेट से फूंकना मुश्किल होता है।
- बातचीत. घर पर समझा दें: ज़ोर से फूंकना है, जैसे केक की मोमबत्तियां बुझाते हैं।
साथ क्या लाएँ
- जांच का पर्चा
- बच्चे के इनहेलर
- पसंदीदा खिलौना
- बच्चे के कागज़ात
यह कैसे होता है
- बच्चा सीधा बैठता है, नाक पर नरम क्लिप लगाया जाता है
- उसे बताया जाता है कि क्या करना है, अक्सर स्क्रीन पर खेल दिखाते हैं
- वह गहरी सांस लेता है और नली में ज़ोर से फूंकता है
- अच्छा नतीजा लाने के लिए कई बार दोहराया जाता है
- कभी इनहेलर देकर 15–20 मिनट बाद जांच दोबारा की जाती है
आपको क्या महसूस होगा
- दर्द नहीं होता
- नाक पर क्लिप थोड़ा अजीब लगता है
- बार-बार फूंकने से चक्कर या खांसी आ सकती है
उसके बाद
- नतीजा आमतौर पर उसी समय मिलता है
- डॉक्टर उसे समझाएंगे और ज़रूरत हो तो इलाज बदलेंगे
- बच्चे की तारीफ़ करें, इससे अगली बार आसानी होती है
इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- जांच के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ़ हो, छाती में सीटी बजे और इनहेलर से आराम न मिले, तो आपातकालीन सेवा (112) को कॉल करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
किस उम्र से हो सकती है?
आमतौर पर 5–6 साल से, जब बच्चा निर्देश मान सके। डॉक्टर से पूछ लें।
अगर बच्चे से न हो पाए तो?
ऐसा होता है। जांच दोहराई जाती है, कभी किसी और दिन।